एसजीआरआर विश्वविद्यालय में मनाया गया हरेला पर्व, लगाए एक फलदार व औषधीय वृक्ष

प्रकृति को संरक्षित रखने का पर्व है हरेला
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एसजीआरआर विश्वविद्यालय में मनाया गया हरेला पर्व, लगाए एक फलदार व औषधीय वृक्ष
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देहरादून। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में शनिवार को हरेला पर्व के अवसर पर स्कूल ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंसेस व राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा संयुक्त रूप से वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति, शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कर्मचारियों ने विभिन्न फलदार व औषधीय वृक्ष लगाए।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री महंत देवेंद्र दास जी महाराज ने हरेला पर्व पर प्रेषित अपने संदेश में कहा कि हरे-भरे वृक्ष प्राणवायु देने के साथ-साथ कई रोगों को दूर भी करते हैं। साथ ही वृक्ष हमारे जीवन की कई आवश्यकताओं की पूर्ति भी करते हैं इसलिए हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का पालन करना चाहिए। प्रकृति हमें हर पल कुछ न कुछ देती ही रहती है। हम वृक्ष लगाकर प्रकृति के प्रति अपना आभार व्यक्त कर सकते हैं। साथ ही पर्यावरण को संरक्षित रखने की मुहिम में भी अपना योगदान भी दे सकते हैं। हरेला पर्व स्वयं को प्रकृति से जोड़ने का पर्व है। उन्होंने आह्वान किया कि वृक्षारोपण की इस मुहिम में समाज के सभी लोगों को अपने-अपने स्तर पर भाग लेना चाहिए।
इस मौके पर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. यू. एस. रावत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें अपनी वन संपदा को संरक्षित रखने के प्रयास करने होंगे। हमें विकास और पर्यावरण के साथ संतुलन स्थापित करना होगा तभी हम सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है। उन्होंने कहा कि आज जितनी भी आपदाएं आ रही है वह पर्यावरण असंतुलन का ही परिणाम हैं। पर्यावरण संतुलन में वृक्षारोपण की अहम भूमिका है। हमारी संस्कृति में पेड़ों की पूजा की जाती है। हम अधिक से अधिक पेड़ लगाकर पर्यावरण को भविष्य के लिए भी सहेज सकते हैं। इसलिए हमें प्रकृति के त्योहार हरेला को बढ़-चढ़कर मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर शैक्षणिक पाठ्यक्रम के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। साथ ही विश्वविद्यालय समन्वित शिक्षा प्रणाली के माध्यम से छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रहा है। उनका कहना था कि नवीन शिक्षा नीति हमें शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण, समाज, संस्कारों और नैतिक मूल्यों से जोड़ने वाली है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय समय-समय पर भविष्य में भी अनवरत रूप से पर्यावरण संरक्षण संबंधी कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।
विश्वविद्यालय कुलसचिव प्रो. दीपक साहनी ने कहा कि पर्यावरण को संरक्षित करके ही हम मानव जाति के भविष्य को सुरक्षित रख सकते हैं। वृक्ष हमारे पर्यावरण को स्वस्थ रखने के साथ-साथ खुशहाली भी लाते हैं। हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने के साथ-साथ उन्हें जीवित रखने और बढ़ाने का संकल्प भी लेना चाहिए।
कार्यक्रम में मौजूद अनुपम सर्व सेवा समिति की संरक्षक डाॅ. इंदुबाला का कहना था कि लोगों को कोरोना से बचाने में पेड़ों का अहम योगदान रहा है। एक पेड़ सौ संतानों के समान है। हरेला पर्व हमारी संस्कृति का त्योहार है। उन्होंने कहा कि वे अपनी संस्था के माध्यम से देहरादून की लीची को फिर एक नई पहचान दिलाना चाहती हैं। इसलिए उनकी संस्था अधिक से अधिक लीची के वृक्ष रोपित करवा रही हैं।
इस अवसर पर एनसीसी ग्लर्स यूनिट द्वारा पर्यावरण संरक्षण की थीम पर गीत भी प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. दीपक सोम ने किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षकों और कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण का संकल्प भी लिया। इस दौरान कोरोना प्रोटोकॉल्स का पूरी तरीके से पालन किया गया।
इस मौके पर एनएसएस समन्वयक प्रो.एस.सी. पचैरी, कृषि संकाय की डीन प्रो. मनीषा सिंह, समाजिक विज्ञान संकाय की डीन प्रो. सरस्वती काला, रिसर्च डीन प्रो. अरूण कुमार सहित समस्त शिक्षक स्टाॅफ और कर्मचारी मौजूद थे।

एसजीआरआर विश्वविद्यालय में हरेला पर्व पर पौधरोपण करते कुलपति प्रो. यू. एस. रावत एवं विश्वविद्यालय स्टाॅफ।
स्टाफ को पौधे भेंट में देते एसजीआरआर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यू. एस. रावत एवं विश्वविद्यालय स्टाॅफ।
स्टाफ के साथ एसजीआरआर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यू. एस. रावत व अनुपम सर्व सेवा समिति की संरक्षक डाॅ. इंदुबाला।